Saturday, December 15, 2007

अब मजदूरों पर गोली चलना भी खबर नहीं होती


सत्येन्द्र प्रताप

नोएडा में गोली चली। फैक्ट्री के गार्ड ने चलाई। उत्तेजित मजदूरों ने घुसकर तोड़फोड़ की। पुलिस आई, विरोध करने वालों की तोड़ाई की और सुरक्षा कड़ी कर दी गई। न कोई बहस न चर्चा। नामी गिरामी अखबारों ने एक कालम की खबर दी और कर्तव्यों की इतिश्री।

अखबार और चैनलों में खबर तभी होती है, जब मजदूरों पर गोली चले और दहाई में मौतें हों। ओबी वैन की रेंज में अगर कोई बच्चा गड्ढे में गिर जाए तो खबर। तात्कालिक समस्या है। खबर चलेगी- उसका असर होगा। गड्ढा पाट दिया जाएगा।

मजदूर जब अपना हक मांगता है तो लाला उसे लात मार देता है। अगर वो संगठित होता है तो लाला की सुरक्षा में लगी पुलिस की पिटाई पड़ती है। न्यूज बैल्यू भी तो नहीं है। अगर ये समस्या उठाई जाए तो उसका कोई हल तो निकलना नहीं है। बेरोजगारी तो दूर नहीं होनी है। क्या फायदा। मरने दो। मर जाएंगे, गरीबों की संख्या घट जाएगी। उतने ही गरीब बचेंगे जो लाला की चाकरी करके आराम से रोजी-रोटी चला लें। ज्यादा टिपिर-टिपिर करेंगे तो पीटने के लिए खाकी वर्दी है ही। अगर खाकी वालों का भी जमीर जाग गया तो निजी सुरक्षाबल रखने की कूबत तो है ही। उनसे पिटवा देंगे। तो कोई मतलब नहीं है ज्यादा टें-टें करने का।

3 comments:

om kabir said...

सत्येंद्र जी आजकल गरीब का जीना खबर होता है, मरना नहीं। संवेदनहीन समाज में यह संभव है। आश्चयॆ नहीं हो रहा है। आपकी चिंता जायज है। लिखना भी। आपने इतने गंभीर मुद्दो को उठाया है। यह काबिलेतारीफ है। आप जैसे लोगों को ही आगे आना होगा। किसी भी रूप में कहीं से भी इसमें अपना योगदान देना होगा। सामाजिक चिंतन जरूरी है। शब्दों के स्तर भी। चाहे किसी भी रूप में हो। लड़ाई तो लड़नी ही पड़ेगी। इस तरह के मुद्दों को अपनी लेखनी को जिंदा रखना है। आपको धन्यवाद। इस तरह के लेखन के लिए।

दिनेशराय द्विवेदी said...

सत्येंद्र जी,
बहुत बहुत धन्यवाद। इस समाचार और टिप्पणी के लिए। मजदूर वर्ग आज हाशिए पर या यूं कहें कि पृष्ठ भूमि में चला गया है। इस के लिए मजदूर वर्ग की स्वनाम धन्य पार्टियां जिम्मेदार हैं। आज के हालात में मजदूर वर्ग का संघर्ष राजनैतिक हो गया है लेकिन इन पार्टियों ने इस वर्ग में राजनैतिक चेतना के विस्तार के काम को तिलांजलि दे दी है। जिस का असर समूचे तंत्र पर पड़ा है। जब तक मजदूर वर्ग का कोई बड़ा आन्दोलन नहीं खड़ा होता यह हालत बनी रहेगी। यही वर्ग है जिस के उठ खड़े होने पर ही देश का भविष्य भी निर्भर करता है।

pururava akhilesh said...

om kabir ki yah salah khatarnaak hai ki आप जैसे लोगों को ही आगे आना होगा। किसी भी रूप में कहीं से भी इसमें अपना योगदान देना होगा। .... satark rahiyega....bhaai ne yah nahi likha hai ki hum logo ko age aana hoga....