Monday, January 21, 2008

माया की हनक



सत्येन्द्र प्रताप
उत्तर प्रदेश की राजनीति पर बसपा की हाथी छाने के बाद कांग्रेस, सपा, भाजपा सहित प्रदेश में जनाधार रखने वाली सभी पार्टियों पर असर पड़ा है। बुंदेलखंड के मुद्दे पर राहुल ने माया को ललकारा वहीं मुलायम भी सारे दाव चल रहे हैं। हालत यहां तक पहुंच गई है कि प्रदेश में सपा-कांग्रेस में समझौते के आसार बनने लगे हैं।
उत्तर प्रदेश में समीकरण बदला है। पहले जहां अंबेडकर और जगजीवन राम जैसे बड़े नामों के साथ वहां का आम दलित जुड़ा था, वह मायावती की झोली में पहुंच गया। एक मजबूत जनाधार के बाद मायावती ने कांग्रेस के समीकरण को दोहराने की कोशिश की। कांग्रेस का फार्मूला ब्राह्मण-दलित-मुस्लिम गठजोड़ बना और सफल भी रहा। बदला है तो सिर्फ इतना कि पहले सत्ता कुलीन और उच्च वर्ग के हाथ में हुआ करती थी और अब दलित नेता मायावती के हाथ आ गई है।
स्वाभाविक है कि सत्ता से जु़ड़े रहने का लोभ रखने वालों ने मायावती का साथ दिया और मंडल कमंडल के साथ कांग्रेस भी धूल फांकने लगी। हाल के गुजरात चुनावों में माया का कोई जादू नहीं चला, लेकिन यूपी में पूर्ण बहुमत के मानसिक बढ़त ने इतना प्रभाव जरूर डाला कि तमाम सीटों पर कांग्रेस हार गई। यही किस्सा हिमाचल में भी दोहराया गया।
यूपी में हार का स्वाद चख चुके मुलायम को भी कोई रास्ता नहीं सूझ रहा है। कांग्रेस, मध्य प्रदेश और राजस्थान को लेकर चिंतित है कि कहीं मायावती ने आगामी चुनावों में इन राज्यों में ४ प्रतिशत वोटों की सेंधमारी की तो हालत पतली होना तय है। इसी के साथ कम्युनिष्टों की धमकी से भी कांग्रेस के माथे पर बल पड़ रहा है।
ऐसे हालत में ऊंट किस करवट बैठने जा रहा है, सबकी नज़र इसी पर है।

1 comment:

संजय तिवारी said...

भैया सत्येन्द्र मैंने अपने ब्लाग visfot.com से टिप्पणी माडरेशन पर रोक हटा दी है. लेकिन आप जरा यह टिप्पणी पढ़ते ही मेल करें. बीएस के हिन्दी संस्करण के बारे में आपसे कुछ और जानेंगे.
sanjaytiwari07@gmail.com