Sunday, November 30, 2008

गंदी राजनीति की एक और मिसाल- आईएसआई के चीफ को बुलाना, गृहमंत्री का इस्तीफा देना

धांसू राजनीतिग्य हैं ये कांग्रेस वाले। आखिर इतना लंबा इतिहास जो है। दिल्ली के चुनाव को किस तरह से मैनेज किया इन सभों ने। दिल्ली के चुनाव को ध्यान में रखकर ये खबर इस्लामाबाद से प्लान कराई गई कि भारत के प्रधानमंत्री ने अपने पाकिस्तानी समकक्ष से फोन कर आईएसआई के मुखिया को भारत भेजने की मांग की और यह आग्रह पाकिस्तान ने स्वीकार भी कर लिया। कोशिश की गई है कि जनता की थू-थू से थोड़ा बचा जा सके। और हुआ भी यही, इधर आधी वोटिंग भी नहीं हुई थी कि पाकिस्तान से खबर आई कि वे आईएसआई के चीफ को नहीं भेज रहे हैं। उसके बाद से ही भारत के प्रधानमंत्री के मुंह में ताला लग गया है। अब उन्होंने गृहमंत्री से इस्तीफा ले लिया। अलग खबर चल पड़ी। पाकिस्तान वाला धारावाहिक दब गया। अगर कोई पूछे भी कि मनमोहन भाई, वो पाकिस्तानी प्रधानमंत्री तो आपकी बात मानता ही नहीं, अब क्या करेंगे? तो स्पष्ट रूप से कह देंगे, ऐसा तो हमने कुछ कहा ही नहीं। मीडिया ने ऐसा भ्रम फैलाया कि मैने पाक प्रधानमंत्री से आईएसआई के चीफ को भेजने को कहा था।

8 comments:

आदर्श राठौर said...

राजनेताओं की ऐसी तैसी करने का वक्त आ गया है
ज़रूरी है कि इनकी हेकड़ी निकाल दी जाए। इन्हें जितनी भी गालियां दी जाए कम हैं।

Khatri The KING said...

I am not getting what was the objective behind all this political drama.
Manmohan singh and his government is totally rubbish in handeling political or security issues.
Manmohan singh and Shivraj patil are two worst ministers and politicians ever produced in india.

Arvind Mishra said...

देखिये घटनाक्रम कुछ इस तरह बीता -चोर की दाढी में तिनका -जैसे ही प्रधानमंत्री के राष्ट्र के नाम संदेश की घोषणा हुयी पाक कांपा -उसे लग गया कि कहीए भारत आक्रमण न कर दे -उसी समय तुरत कूटनीतिक चालें तेज हो गयीं -पर जब उसे प्रधानमंत्री के संदेश के बाद लगा कि पूरा मामला ही भींगी फुलझडी हो चुका है उनके तेवर भी तल्ख़ हुए और उन्होंने इत्मीनान से क़दमों को वापस खींच लिया यह देखें -कृपया वोट करें -http://mishraarvind.blogspot.com/

COMMON MAN said...

छुद्र स्वार्थों के चलते यह दुर्गति हुई है. कांग्रेस का इतिहास उठाकर देखिये, इसकी स्थापना का मूल उद्देश्य ही लोगों के क्रोध को न्यूट्रलाइज करना था.

Suresh Chiplunkar said...

एक अंतर्राष्ट्रीय खबर और भी है कि आतंकियों ने इटली और सऊदी अरब के पासपोर्ट देखकर उन लोगों को छोड़ दिया है… एक और ब्रेकिंग न्यूज मेरी तरफ़ से लीजिये कि लोकसभा का चुनाव जीतने के लिये कांग्रेस अब पाकिस्तान पर हमला करने जा रही है… कांग्रेस जितनी गिरी हुई पार्टी और कोई हो नहीं सकती, ये बात पहले भी मैं एक पोस्ट में तथ्यों और तर्कों के साथ बता चुका हूं…

satyendra... said...

जो आदमी आर्थिक नीतियां बनाते समय अमेरिका के मुंह देखता था, वह गृहमंत्री हो गया? अब वह जाकर अमेरिका के सामने रोएगा, कोई नीति बताओ मेरे आका- जिसे हम लागू करें और आतंक से मुक्ति पाएं। एक असफल वित्तमंत्री को गृहमंत्री बना देने से दोनो विभागों की आलोचना से छुटकारा पाना चाहते हैं मनमोहन, लेकिन क्या यह संभव है?

Pt. D.K.Sharma "Vatsa" said...

अब क्या कहें, सरकार चाहे अटल बिहारी वाजपेयी की हो या मनमोहन सिंह की, आतंकवाद हमारी नियति है। ये तो केवल भूमिका बन रही है, हम पर और बड़ी विपत्तियां आने वाली हैं।क्यूं कि 2020 तक महाशक्ति बनने का सपना देख रहे इस देश की हुकूमत चंद कायर और सत्तालोलुप नपुंसक कर रहे हैं।

jagat said...

karm se lala kya kshatryata ka dharm nibhayega, congress ne pahale hi ek lala ko pradhanmantri bana kar des ka satyanash kar diya hai, jo har kaam ko karane se pahale aaka no. 1 (soniya gandhi) aur aaka no. 2 (america) ki taraf niharata rahata hai. shanti varta karane wale(loksabha adhyaksh)patil ne jab desh mein shanti nahin rakh sake to bhala yeh lala (p.chidambaram) kya aatankvaad se ladh sakega. iska to yeh bhi dhyan rakhna padega ki kahin do paise bachane ke chakkar mein aantarik suraksha karmiyo ko hathiyar ke roop mein khilone na pakda de