Monday, March 22, 2010

यमुना सफाई की नई मुहिम रंग लाई



सत्येन्द्र प्रताप सिंह





अगर किसी काम को पूरा करने का संकल्प लिया जाए तो कुछ भी असंभव नहीं है।
आर्ट आफ लिविंग के संस्थापक श्री श्री रविशंकर की अगुआई में पिछले मंगलवार को शुरू हुए यमुना सफाई अभियान ने कुछ ऐसा ही रंग दिखाया। 'मेरी दिल्ली, मेरी यमुना' नाम से शुरू किए गए रविशंकर के इस अभियान में न केवल आर्ट आफ लिविंग से जुड़े लोग शामिल हुए, बल्कि दिल्ली जल बोर्ड की योजना 'आओ यमुना में जान डालें' भी शामिल हुई।
साथ ही नगर निगम की गाड़ियां भी पूर्व निर्धारित सफाई स्थल पर पहुंचने लगीं। स्थिति यह हुई कि पहले यमुना के आईटीओ घाट की चमक बढ़ी, 18 मार्च को वजीराबाद, 19 को निजामुद्दीन, 20 को कालिंदी कुंज, 21 मार्च को आईएसबीटी के पास कुदसिया घाट पर सुंदरता वापस लौट आई।
24 मार्च तक चलने वाले इस अभियान के दौरान कुल 7 घाटों का उध्दार होना है। करीब 10 महीने से दिल्ली जल बोर्ड यमुना की सफाई का अभियान 'आओ यमुना में जान डालें' चला रहा है, जो यमुना एक्शन प्लान-2 का हिस्सा है।
योजना में 4 स्तर पर काम किए जा रहे हैं, जिसमें स्कूल, झुग्गी-झोपडियों, अनधिकृत कालोनियों और ग्रामीण इलाके शामिल हैं। इन इलाकों में नुक्कड़ नाटक, फिल्म शो, जूट के थैले वितरित कर और अन्य पोस्टर बैनर के माध्यम से यमुना की सफाई के लिए जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है।
श्री श्री रविशंकर के 'मेरी दिल्ली, मेरी यमुना' कार्यक्रम में जल बोर्ड की भी योजना शामिल हो गई। पहले जहां यह योजना गरीब बस्तियों तक सिमटी हुई थी, रविशंकर के आह्वान के साथ खूबसूरत बने अपार्टमेंट से निकलकर लोग सफाई के लिए सामने आने लगे।
कालिंदी कुंज में सफाई अभियान का नेतृत्व कर रहे एनजीओ आराधना से जुड़े कार्यकर्ताओं का कहना है कि इस कार्यक्रम को बेहतर समर्थन मिल रहा है, खासकर उन लोगों का जिनके गंदे घाटों पर आने की उम्मीद हम कभी नहीं करते थे।
सफाई के काम में लगे 'सोसायटी फार सोशल डेवलपमेंट' के ब्रजेश कुमार कहते हैं, 'सफाई की जिम्मेदारी किसी एक व्यक्ति या विभाग या सरकार की नहीं है। सबने मिलकर यमुना को गंदा किया है। इसमें सरकार की लापरवाही तो है ही, फैक्टरियों की गंदगी के साथ आम लोगों की भी लापरवाही झलकती है।'
गाजियाबाद के इंदिरापुरम से कालिंदी कुंज में यमुना सफाई अभियान में शामिल होने आए राजीव कहते हैं, 'राष्ट्रमंडल खेल होने जा रहे हैं। अगर यमुना में गंदगी का आलम यही रहा तो आखिर दुनिया भर से आने वाले खिलाड़ी और अन्य लोग किस तरह का संदेश लेकर जाएंगे?'
स्वयंसेवी संस्थाओं, सरकारी महकमों और आम लोगों के साथ कंपनियों ने भी इस योजना में बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। जहां सफाई अभियान चल रहा होता है वहां फिलिप्स पीने के स्वच्छ पानी की व्यवस्था करती है तो मैक्स हेल्थ केयर किसी तरह की स्वास्थ्य समस्या होने पर इलाज के लिए तैयार रहती है।
श्री श्री रविशंकर का कहना है- यमुना की सफाई पर हजारों करोड़ रुपये खर्च किए जा रहे हैं पर कुछ परिणाम नहीं निकल रहा। अगर हम 'मेरी दिल्ली मेरी यमुना' की बात समझेंगे तो इसमें प्लास्टिक की थैली या बोतल आदि जैसी गंदगी नहीं फैलाएंगे।
उन्होंने कहा कि यमुना में 18 बड़े और 1557 छोटे नाले गिरते हैं। इनके पानी को साफ करने की जरूरत है, जिसके बाद इसका उपयोग अन्य कामों के लिए किया जा सके।



http://hindi.business-standard.com/storypage.php?autono=32338


2 comments:

कृष्ण मुरारी प्रसाद said...

मतलब कि अभी लोगों के आँखों में बहुत पानी बचा है....अच्छी प्रस्तुति......
......
विश्व जल दिवस....नंगा नहायेगा क्या...और निचोड़ेगा क्या ?
लड्डू बोलता है ....इंजीनियर के दिल से....
http://laddoospeaks.blogspot.com/2010/03/blog-post_22.html

ज्ञानदत्त पाण्डेय Gyandutt Pandey said...

अच्छा लगा यह जान कर कि लोग आगे आ रहे हैं।