Sunday, May 8, 2011

आगरा तक पहुंचा किसान आंदोलन

जबरन भूमि अधिग्रहण के खिलाफ शनिवार को नोएडा से भड़का किसानों का उग्र आंदोलन निर्माणाधीन यमुना एक्सप्रेसवे के आखिरी छोर आगरा तक पहुँच गया है.

अधिकारियों के अनुसार रविवार को आगरा में किसानों के साथ संघर्ष में प्रांतीय सशस्त्र बल पीएसी के कम से कम चार जवान घायल हो गए हैं, जबकि नोएडा में मरने वालों की संख्या पांच हो गई है.

नोएडा में मरने वालों में दो पुलिस जवान और दो किसान हैं , जबकि पांचवें व्यक्ति की शिनाख्त नही हो पाई है.

आगरा के पुलिस उप महानिरीक्षक असीम अरुण ने बीबीसी को बताया कि शनिवार को नोएडा की घटना की प्रतिक्रिया में छलेसर के पास चौगान गढ़ी गाँव के करीब दो दर्ज़न किसानों ने जेपी उद्योग समूह के कैम्प आफिस और जेनरेटर में आग लगा दी.

मौके पर तैनात पीएसी के जवान पहुंचे और बल प्रयोग कर किसानों को खदेड़ा तो किसानों ने सरिया से जवाबी हमला कर दिया. संघर्ष में पीएसी के चार जवान घायल हो गए.

खबर पाकर आगरा से वरिष्ठ अधिकारी फ़ोर्स लेकर मौके पर पहुंचे. फ़ोर्स के डर से किसान गाँव के अंदर चले गए.

पुलिस का कहना है कि संघर्ष में ग्रामीणों के घायल होने की सूचना नहीं है.

ख़बरें हैं कि जेपी ग्रुप के लोग सड़क के पास के एक मंदिर को हटाना चाहते थे और एक निर्माणाधीन धर्मशाला की दीवार तोड़ दी थी जिससे किसान भड़क गए.

लेकिन अधिकारियों का कहना है कि मंदिर या धर्मशाला को हटा कर दूसरे जगह ले जाना ही मुद्दा नहीं है.

मायावती सरकार ने नोएडा से लेकर आगरा के बीच हजारों एकड जमीन अधिगृहित कर भुगतान आधारित एक्सप्रेसवे सड़क ,औद्योगिक क्षेत्र और रिहायशी कालोनियां आदि बनाने का ठेका जेपी ग्रुप को दिया है.

जेपी ग्रुप पहले चरण का काम अक्टूबर तक पूरा करना चाहता है. दूसरी ओर किसान अपनी पुश्तैनी जमीन लिए जाने और मुआवजे में दी गई धनराशि से नाराज हैं.

जेपी ग्रुप की ओर से कोई बयान नही आया है, जबकि सरकारी अधिकारियों का कहना है कि अधिकाँश किसानों ने मुआवजा ले लिया है और केवल कुछ लोग राजनीतिक स्वार्थवश किसानों को भड़का रहे हैं.

विपक्ष का आरोप है कि मुख्यमंत्री मायावती और उनकी सरकार के अधिकारियों ने जेपी उद्योग समूह को अनुचित लाभ पहुंचाने के लिए इतने बड़े पैमाने पर जमीन अधिग्रहित की है और उसमें उनका निजी स्वार्थ शामिल है.

नोएडा में मृतक संख्या बढ़ी

इस बीच उत्तर प्रदेश में विशेष पुलिस महानिदेशक बृजलाल दल बल के साथ नोएडा के भट्टा गाँव में डेरा डाले हैं.

बृजलाल ने पत्रकारों को बताया कि कालू नामा के एक और किसान के मरने की पुष्टि हुई है. इस तरह कम से कम दो किसान और दो पुलिस वाले शनिवार के संघर्ष में मारे गए हैं.

मालूम हुआ है कि पुलिस ने एक और ग्रामीण की लाश बरामद की है , लेकिन अभी उसकी शिनाख्त नही हो पाई है.

भट्टा गाँव पुलिस छावनी में बदल दिया है. गाँववालों ने आरोप लगाया है कि पुलिस ने घरों में लूटपाट की है और खेतों में आ लगा दी है.

पुलिस की कई टीम सर्वदलीय किसान संघर्ष समिति के नेता मनवीर सिंह तेवतिया को पकड़ने के लिए जगह जगह छापे मार रही हैं. पुलिस ने तेवतिया को पकडवाने के लिए पचास हजार का ईनाम भी घोषित किया है.

जमीन अधिग्रहण से नाराज किसान कई महीने से मुख्यमंत्री मायावती से मिलने की मांग कर रहे हैं. लेकिन मुख्यमंत्री की ओर से अभी तक ऐसी कोई पहल नही हुई. शनिवार की घटना पर मुख्यमंत्री की प्रतिक्रिया का अभी भी इंतज़ार है.

courtsy: http://www.bbc.co.uk/hindi/india/2011/05/110508_farmer_unrest_skj.shtml

3 comments:

प्रवीण पाण्डेय said...

कोई तो रोके इसे।

इष्ट देव सांकृत्यायन said...

इन छिटपुट आन्दोलनों और आवेश में आकर की गई हिंसा से किसान सिर्फ़ अपना ही नुकसान कर रहे हैं. ज़रूरत एक संगठित और व्यापक आंदोलन की है. सिर्फ़ किसानों नहीं, सभी मेहनतकश और सुविधाओं से वंचित वर्गों को एक साथ लेकर.

satyendra... said...

भाई साहब, एक वर्ग जो खुद को मेहनतकश कहता है (है भी) वो तलवार भांज रहा है कि ये ऐयाश और खाए अघाये गुंडे हैं, जो बहन जी के खिलाफ कुछ बहन जी विरोधियों के भडकाने से दंगा कर रहा है.
आंदोलन तो कुछ हद तक संगठित है, लेकिन हकीकत ये है कि जो वर्ग किसानी से ज्यादा गहरा जुड़ा है, मंडल आयोग के बाद थोड़ा एकजुट हुआ है. ये सबसे ज्यादा असंगठित और भ्रमित समाज है, जो बरसों से यू ही हांका जाता रहा है!!