Thursday, April 16, 2009

पड़ रहे हैं जूते, चप्पल और खड़ाऊं

अब लौह पुरुष लाल कृष्ण आडवाणी के ऊपर खड़ाऊं फेकी गई। फेकने वाले का कहना है कि आडवाणी लौह पुरुष नहीं, दोमुहें व्यक्ति हैं। कहीं ऐसा तो नहीं कि कार्यकर्ता ने यह देखने के लिए लकड़ी की चप्पल चलाई कि आडवाणी सचमुच लोहे के हैं या नहीं। उसने सोचा कि अगर लोहे के होंगे, तो धातु से लकड़ी के टकराने पर अलग आवाज आएगी और पता चल जाएगा कि वह लोहे के बने हैं या नहीं। बहरहाल...

भारत में जूता फेंको अभियान की शुरुआत एक वरिष्ठ पत्रकार जरनैल सिंह ने की। कांग्रेस ने सज्जन कुमार और जगदीश टाइटलर का टिकट काट दिया। सूत्रों के मुताबिक कांग्रेस ने टिकट काटने के बाद महसूस किया कि १२ बजे प्रेस कांन्फ्रेंस आयोजित होने के चलते जरनैल सिंह को गुस्सा आया।

वहीं कांग्रेस सांसद के ऊपर शिक्षक ने इसलिए जूता चलाया कि वह दारू पिए था। नवीन जिंदल ने तुरंत पकड़ लिया। लेकिन असली वजह स्पष्ट नहीं है।

अब कहीं ऐसा न हो कि जूता-चप्पल चलाकर लोकप्रियता पाने की कोशिश करने वालों के भाग्य का फैसला नेता के समर्थक ही कर दें और उनकी जमकर धुनाई हो जाए???

2 comments:

दिनेशराय द्विवेदी Dineshrai Dwivedi said...

वह दिन भी दूर नहीं।

ज्ञानदत्त पाण्डेय | Gyandutt Pandey said...

इस सीजन का यही फैशन है। और शाश्वत नहीं रहेगा, यह भी तय है। कहीं यह फैशन किसी जूता फैंकक के मरणान्तक मार खाने से न बन्द हो!