Thursday, January 8, 2009

सत्यम को बेलआउट पैकेज की जरूरत


सत्यम कंप्यूटर्स के मुखिया रामलिंग राजू ने सिर्फ पूंजीवादी कार्पोरेट जगत का चेहरा देश के सामने रखा है। आखिर भारत में सभी लोग राजू को खलनायक, फ्राड और झूठा साबित करने पर क्यों तुले हैं? ऐसा ही कुछ तो इस समय दुनिया भर में हो रहा है। कंपनियां, बैंक, विभिन्न संस्थानों का फ्राड सामने आ रहा है, वे धराशायी हो रही हैं और वहां की सरकारें बेलआउट पैकेज देकर कंपनियों को बचाने की कोशिश कर रही हैं। आखिर वैसा ही कुछ तो राजू ने भी किया था- इसमें क्या गलत किया।


एक किसान परिवार में जन्मे रामलिंग राजू एक सप्ताह पहले तक देश के हीरो थे। यहां तक कि अमेरिका जैसा पूंजीवादी देश भी उनसे भयभीत रहते थे। अचानक जीरो कैसे हो गए?? पूंजीवादी व्यवस्था में ऐसा ही होता है कि पैसे से पैसा बनाया जाए। राजू ने भी यही किया। कंपनी का विस्तार करते चले गए। भले ही गलत बैलेंस शीट दिखाया। अगर विस्तार योजनाएं कारगर हो जातीं तो?? तब तो कंपनी के सभी शेयरधारकों की बल्ले-बल्ले होती ना। तब कोई उंगली नहीं उठाता कि गलत हुआ या किसी की जेब काटकर कोई अमीर हुआ है।


अब उद्योग जगत को ही देखिये। ऐसी व्यवस्था तो नहीं सोची जा रही है कि आम आदमी की कमाई बढ़े और वह गाड़ियां, मकान आदि-आदि खरीदने में सक्षम हो। उद्योग जगत यही मांग कर रहा है कि रिजर्व बैंक कर्ज सस्ता करे, लोग कर्ज लेकर घी पिएं और बाद में जब कर्जदार उन्हें घेरना शुरू करें तो वे आत्महत्या कर लें, डकैती करें, लूट करें, फ्राड करें या कुछ भी करें। कर्ज का भुगतान कर दें बैंकों को।


ऐसी नीति में तो यही जायज होगा कि जिस व्यक्ति ने ५०-६० हजार लोगों को पिछले बीस साल तक रोजी-रोटी दी, उसे गुनाहगार न मानते हुए तत्काल बेलआउट पैकेज दे दे। आखिर राजू ने क्या बुरा किया? अगर उन्होंने कंपनी का पैसा कहीं और जमा कर रखा हो तो सरकार उसे ढूंढे और जब्त कर ले या बेल आउट पैकेज में शामिल कर ले। लेकिन देश के गौरव के रूप में स्थान बना चुकी सत्यम कंप्यूटर्स को बचाना जरूरी है। वर्तमान पूंजीवादी व्यवस्था की यही मांग है।

3 comments:

अमित पाण्डेय said...

Sir ji
Baat to apne sahi kahi hai.

Suresh Chiplunkar said...

जी हाँ, तेलगी द्वारा छापे गये सभी स्टाम्प पेपर को सरकार वैध घोषित कर दे तथा तेलगी को राष्ट्रीय नायक घोषित कर दे… यही कहना चाहते हैं ना…

विनय said...

काम ढ़ग से किया जाये तो प्रशंसा मिलती है, रावण भी मोक्ष चाहता था इसलिए उसने सीता हरण किया और रामेश्वरं मंदिर की स्थापना में ब्राहम्ण बनकर राम को विजयी होने का आशीर्वाद दिया और अपने पैर पर कुल्हाड़ी मार ली या अपनी इच्छा पूरी कर ली, फिर भी सीता हरण तो अपराध ही था, बल्ले-बल्ले हुई नहीं तो अब जिनका माल डूबा वो क्या करें, भीख माँगें, सज़ा तो होनी ही चाहिए, अपने लेख पर पुन: विचार करें।